श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.20.16

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

एवं शप्तः स्वगुरुणा सत्यान्‍न चलितो महान्।

वामनाय ददावेनामर्चित्वोदकपूर्वकम्॥ १६

evaṃ śaptaḥ svaguruṇā satyānna calito mahān|

vāmanāya dadāvenāmarcitvodakapūrvakam|| 16

अर्थ

राजा बलि बड़े महात्मा थे। अपने गुरुदेवके शाप देनेपर भी वे सत्यसे नहीं डिगे। उन्होंने वामनभगवान्‌की विधिपूर्वक पूजा की और हाथमें जल लेकर तीन पग भूमिका सङ्कल्प कर दिया॥ १६॥✎ 797

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #797 शब्दोंके बीचका स्थान: वामनभगवान् की → वामनभगवान्‌की

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