arthaṃ kāmaṃ yaśo vṛttiṃ yo na bādheta karhicit|| 2
अर्थ
राजा बलिने कहा—भगवन्! आपका कहना सत्य है। गृहस्थाश्रममें रहनेवालोंके लिये वही धर्म है जिससे अर्थ, काम, यश और आजीविकामें कभी किसी प्रकार बाधा न पड़े॥ २॥
सत्यं भगवता प्रोक्तं धर्मोऽयं गृहमेधिनाम्।
अर्थं कामं यशो वृत्तिं यो न बाधेत कर्हिचित्॥ २
राजा बलिने कहा—भगवन्! आपका कहना सत्य है। गृहस्थाश्रममें रहनेवालोंके लिये वही धर्म है जिससे अर्थ, काम, यश और आजीविकामें कभी किसी प्रकार बाधा न पड़े॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.20.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 998) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/20/2/