mā yudhyata nivartadhvaṃ na naḥ kālo'yamarthakṛt|| 19
अर्थ
उन्होंने विप्रचित्ति, राहु, नेमि आदि दैत्योंको सम्बोधित करके कहा—‘भाइयो! मेरी बात सुनो। लड़ो मत, वापस लौट आओ। यह समय हमारे कार्यके अनुकूल नहीं है॥ १९॥✎ 8091628
हे विप्रचित्ते हे राहो हे नेमे श्रूयतां वचः।
मा युध्यत निवर्तध्वं न नः कालोऽयमर्थकृत्॥ १९
उन्होंने विप्रचित्ति, राहु, नेमि आदि दैत्योंको सम्बोधित करके कहा—‘भाइयो! मेरी बात सुनो। लड़ो मत, वापस लौट आओ। यह समय हमारे कार्यके अनुकूल नहीं है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1004) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/21/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#809 शब्दोंके बीचका स्थान: वामन-भगवान् को → वामन-भगवान्को