यद्यपि बलि वरुणके पाशोंसे बँधे हुए थे, उनकी सम्पत्ति भी उनके हाथोंसे निकल गयी थी—फिर भी उनकी बुद्धि निश्चयात्मक थी और सब लोग उनके उदार यशका गान कर रहे थे। परीक्षित्! उस समय भगवान्ने बलिसे कहा॥ २८॥✎ 810
तं बद्धं वारुणैः पाशैर्भगवानाह वामनः।
नष्टश्रियं स्थिरप्रज्ञमुदारयशसं नृप॥ २८
यद्यपि बलि वरुणके पाशोंसे बँधे हुए थे, उनकी सम्पत्ति भी उनके हाथोंसे निकल गयी थी—फिर भी उनकी बुद्धि निश्चयात्मक थी और सब लोग उनके उदार यशका गान कर रहे थे। परीक्षित्! उस समय भगवान्ने बलिसे कहा॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.21.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1005) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/21/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)