श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.21.29

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

पदानि त्रीणि दत्तानि भूमेर्मह्यं त्वयासुर।

द्वाभ्यां क्रान्ता मही सर्वा तृतीयमुपकल्पय॥ २९

padāni trīṇi dattāni bhūmermahyaṃ tvayāsura|

dvābhyāṃ krāntā mahī sarvā tṛtīyamupakalpaya|| 29

अर्थ

‘असुर! तुमने मुझे पृथ्वीके तीन पग दिये थे; दो पगमें तो मैंने सारी त्रिलोकी नाप ली, अब तीसरा पग पूरा करो॥ २९॥✎ 810

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #810 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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