भगवान्की कृपासे राजा सत्यव्रत ज्ञान और विज्ञानसे संयुक्त होकर इस कल्पमें वैवस्वत मनु हुए॥ ५८॥✎ 845
स तु सत्यव्रतो राजा ज्ञानविज्ञानसंयुतः।
विष्णोः प्रसादात् कल्पेऽस्मिन्नासीद् वैवस्वतो मनुः॥ ५८
भगवान्की कृपासे राजा सत्यव्रत ज्ञान और विज्ञानसे संयुक्त होकर इस कल्पमें वैवस्वत मनु हुए॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1021) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/58/