श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.59

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

सत्यव्रतस्य राजर्षेर्मायामत्स्यस्य शार्ङ्गिणः।

संवादं महदाख्यानं श्रुत्वा मुच्येत किल्बिषात्॥ ५९

satyavratasya rājarṣermāyāmatsyasya śārṅgiṇaḥ|

saṃvādaṃ mahadākhyānaṃ śrutvā mucyeta kilbiṣāt|| 59

अर्थ

अपनी योगमायासे मत्स्यरूप धारण करनेवाले भगवान् विष्णु और राजर्षि सत्यव्रतका यह संवाद एवं श्रेष्ठ आख्यान सुनकर मनुष्य सब प्रकारके पापोंसे मुक्त हो जाता है॥ ५९॥✎ 845

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #845 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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