saṅkalpāstasya sidhyanti sa yāti paramāṃ gatim|| 60
अर्थ
जो मनुष्य भगवान्के इस अवतारका प्रतिदिन कीर्तन करता है, उसके सारे संकल्प सिद्ध हो जाते हैं और उसे परमगतिकी प्राप्ति होती है॥ ६०॥✎ 846847848
अवतारो हरेर्योऽयं कीर्तयेदन्वहं नरः।
सङ्कल्पास्तस्य सिध्यन्ति स याति परमां गतिम्॥ ६०
जो मनुष्य भगवान्के इस अवतारका प्रतिदिन कीर्तन करता है, उसके सारे संकल्प सिद्ध हो जाते हैं और उसे परमगतिकी प्राप्ति होती है॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1021) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/60/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#846 शब्दोंके बीचका स्थान: लीलामत्स्यभगवान् को → लीलामत्स्यभगवान्को