॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.3.19
यं धर्मकामार्थविमुक्तिकामा
भजन्त इष्टां गतिमाप्नुवन्ति।
किं त्वाशिषो रात्यपि देहमव्ययं
करोतु मेऽदभ्रदयो विमोक्षणम्॥ १९
yaṃ dharmakāmārthavimuktikāmā
bhajanta iṣṭāṃ gatimāpnuvanti|
kiṃ tvāśiṣo rātyapi dehamavyayaṃ
karotu me'dabhradayo vimokṣaṇam|| 19
अर्थ
धर्म, अर्थ, काम और मोक्षकी कामनासे मनुष्य उन्हींका भजन करके अपनी अभीष्ट वस्तु प्राप्त कर लेते हैं। इतना ही नहीं, वे उनको सभी प्रकारका सुख देते हैं और अपने ही जैसा अविनाशी पार्षद शरीर भी देते हैं। वे ही परम दयालु प्रभु मेरा उद्धार करें॥ १९॥✎ 663