श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.4.25

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

ये मां स्तुवन्त्यनेनाङ्ग प्रतिबुध्य निशात्यये।

तेषां प्राणात्यये चाहं ददामि विमलां मतिम्॥ २५

ye māṃ stuvantyanenāṅga pratibudhya niśātyaye|

teṣāṃ prāṇātyaye cāhaṃ dadāmi vimalāṃ matim|| 25

अर्थ

प्यारे गजेन्द्र! जो लोग ब्राह्ममुहूर्तमें जगकर तुम्हारी की हुई स्तुतिसे मेरा स्तवन करेंगे, मृत्युके समय उन्हें मैं निर्मल बुद्धिका दान करूँगा॥ २५॥

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