श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने ऐसा कहकर देवताओंको आनन्दित करते हुए अपना श्रेष्ठ शंख बजाया और गरुड़पर सवार हो गये॥ २६॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धे गजेन्द्रमोक्षणं १ नाम चतुर्थोऽध्यायः॥ ४॥
इत्यादिश्य हृषीकेशः प्रध्माय जलजोत्तमम्।
हर्षयन्विबुधानीकमारुरोह खगाधिपम्॥ २६
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने ऐसा कहकर देवताओंको आनन्दित करते हुए अपना श्रेष्ठ शंख बजाया और गरुड़पर सवार हो गये॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.4.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 922) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/4/26/