श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.4.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

गजेन्द्रो भगवत्स्पर्शाद् विमुक्तोऽज्ञानबन्धनात्।

प्राप्तो भगवतो रूपं पीतवासाश्‍चतुर्भुजः॥ ६

gajendro bhagavatsparśād vimukto'jñānabandhanāt|

prāpto bhagavato rūpaṃ pītavāsāścaturbhujaḥ|| 6

अर्थ

गजेन्द्र भी भगवान्‌का स्पर्श प्राप्त होते ही अज्ञानके बन्धनसे मुक्त हो गया। उसे भगवान्‌का ही रूप प्राप्त हो गया। वह पीताम्बरधारी एवं चतुर्भुज बन गया॥ ६॥

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