श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.15

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

यदा युद्धेऽसुरैर्देवा बाध्यमानाः शितायुधैः।

गतासवो निपतिता नोत्तिष्ठेरन्स्म भूयशः॥ १५

yadā yuddhe'surairdevā bādhyamānāḥ śitāyudhaiḥ|

gatāsavo nipatitā nottiṣṭheransma bhūyaśaḥ|| 15

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जिस समयकी यह बात है, उस समय असुरोंने अपने तीखे शस्त्रोंसे देवताओंको पराजित कर दिया था। उस युद्धमें बहुतोंके तो प्राणोंपर ही बन आयी, वे रणभूमिमें गिरकर फिर उठ न सके॥ १५॥

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