श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.24

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इत्याभाष्य सुरान्वेधाः सह देवैररिन्दम।

अजितस्य पदं साक्षाज्जगाम तमसः परम्॥ २४

ityābhāṣya surānvedhāḥ saha devairarindama|

ajitasya padaṃ sākṣājjagāma tamasaḥ param|| 24

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! देवताओंसे यह कहकर ब्रह्माजी देवताओंको साथ लेकर भगवान् अजितके निजधाम वैकुण्ठमें गये। वह धाम तमोमयी प्रकृतिसे परे है॥ २४॥✎ 684 1366

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #684 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1366 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): २५ → २५॥

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