॥ श्रीहरिः ॥
हन्त ब्रह्मन्नहो शम्भो हे देवा मम भाषितम्।
शृणुतावहिताः सर्वे श्रेयो वः स्याद् यथा सुराः॥ १८
hanta brahmannaho śambho he devā mama bhāṣitam|
śṛṇutāvahitāḥ sarve śreyo vaḥ syād yathā surāḥ|| 18
अर्थ
श्रीभगवान्ने कहा—ब्रह्मा, शंकर और देवताओ! तुमलोग सावधान होकर मेरी सलाह सुनो। तुम्हारे कल्याणका यही उपाय है॥ १८॥✎ 692
हन्त ब्रह्मन्नहो शम्भो हे देवा मम भाषितम्।
शृणुतावहिताः सर्वे श्रेयो वः स्याद् यथा सुराः॥ १८
श्रीभगवान्ने कहा—ब्रह्मा, शंकर और देवताओ! तुमलोग सावधान होकर मेरी सलाह सुनो। तुम्हारे कल्याणका यही उपाय है॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 932) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #692 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने