देवताओ! कोई बड़ा कार्य करना हो तो शत्रुओंसे भी मेल-मिलाप कर लेना चाहिये। यह बात अवश्य है कि काम बन जानेपर उनके साथ साँप और चूहेवाला बर्ताव कर सकते हैं*॥ २०॥✎ 692
अरयोऽपि हि सन्धेयाः सति कार्यार्थगौरवे।
अहिमूषकवद् देवा ह्यर्थस्य पदवीं गतैः॥ २०
देवताओ! कोई बड़ा कार्य करना हो तो शत्रुओंसे भी मेल-मिलाप कर लेना चाहिये। यह बात अवश्य है कि काम बन जानेपर उनके साथ साँप और चूहेवाला बर्ताव कर सकते हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 932) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/20/
टिप्पणियाँ
१
प्रा० पा०—गताः।
(मुद्रित पृष्ठ 932)
*
किसी मदारीकी पिटारीमें साँप तो पहलेसे था ही, संयोगवश उसमें एक चूहा भी जा घुसा। चूहेके भयभीत होनेपर साँपने उसे प्रेमसे समझाया कि तुम पिटारीमें छेद कर दो, फिर हम दोनों भाग निकलेंगे। पहले तो साँपकी इस बातपर चूहेको विश्वास न हुआ, परन्तु पीछे उसने पिटारीमें छेद कर दिया। इस प्रकार काम बन जानेपर साँप चूहेको निगल गया और पिटारीसे निकल भागा।
(मुद्रित पृष्ठ 932)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#692 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने