श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.41

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

एवमामन्त्र्य भगवान्भवानीं विश्‍वभावनः।

तद् विषं जग्धुमारेभे प्रभावज्ञान्वमोदत॥ ४१

evamāmantrya bhagavānbhavānīṃ viśvabhāvanaḥ|

tad viṣaṃ jagdhumārebhe prabhāvajñānvamodata|| 41

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—विश्‍वके जीवनदाता भगवान् शंकर इस प्रकार सती देवीसे प्रस्ताव करके उस विषको खानेके लिये तैयार हो गये। देवी तो उनका प्रभाव जानती ही थीं, उन्होंने हृदयसे इस बातका अनुमोदन किया॥ ४१॥

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