श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अथोपोष्य कृतस्नाना हुत्वा च हविषानलम्।

दत्त्वा गोविप्रभूतेभ्यः कृतस्वस्त्ययना द्विजैः॥ १४

athopoṣya kṛtasnānā hutvā ca haviṣānalam|

dattvā goviprabhūtebhyaḥ kṛtasvastyayanā dvijaiḥ|| 14

अर्थ

इसके बाद एक दिनका उपवास करके सबने स्नान किया। हविष्यसे अग्‍निमें हवन किया। गौ, ब्राह्मण और समस्त प्राणियोंको घास-चारा, अन्‍न-धनादिका यथायोग्य दान दिया तथा ब्राह्मणोंसे स्वस्त्ययन कराया॥ १४॥✎ 719 720

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #719 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #720 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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