अपनी-अपनी रुचिके अनुसार सबने नये-नये वस्त्र धारण किये और इसके बाद सुन्दर-सुन्दर आभूषण धारण करके सब-के-सब उन कुशासनोंपर बैठ गये, जिनका अगला हिस्सा पूर्वकी ओर था॥ १५॥✎ 719720
यथोपजोषं वासांसि परिधायाहतानि ते।
कुशेषु प्राविशन्सर्वे प्रागग्रेष्वभिभूषिताः॥ १५
अपनी-अपनी रुचिके अनुसार सबने नये-नये वस्त्र धारण किये और इसके बाद सुन्दर-सुन्दर आभूषण धारण करके सब-के-सब उन कुशासनोंपर बैठ गये, जिनका अगला हिस्सा पूर्वकी ओर था॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 949) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/9/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)