श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.15

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

यथोपजोषं वासांसि परिधायाहतानि ते।

कुशेषु प्राविशन्सर्वे प्रागग्रेष्वभिभूषिताः॥ १५

yathopajoṣaṃ vāsāṃsi paridhāyāhatāni te|

kuśeṣu prāviśansarve prāgagreṣvabhibhūṣitāḥ|| 15

अर्थ

अपनी-अपनी रुचिके अनुसार सबने नये-नये वस्त्र धारण किये और इसके बाद सुन्दर-सुन्दर आभूषण धारण करके सब-के-सब उन कुशासनोंपर बैठ गये, जिनका अगला हिस्सा पूर्वकी ओर था॥ १५॥✎ 719 720

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #719 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #720 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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