॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.9.4
न वयं त्वामरैर्दैत्यैः सिद्धगन्धर्वचारणैः।
नास्पृष्टपूर्वां जानीमो लोकेशैश्च२ कुतो नृभिः॥ ४
na vayaṃ tvāmarairdaityaiḥ siddhagandharvacāraṇaiḥ|
nāspṛṣṭapūrvāṃ jānīmo lokeśaiśca kuto nṛbhiḥ|| 4
अर्थ
हम समझते हैं कि अबतक देवता, दैत्य, सिद्ध, गन्धर्व, चारण और लोकपालोंने भी तुम्हें स्पर्शतक न किया होगा। फिर मनुष्य तो तुम्हें कैसे छू पाते?॥ ४॥
टिप्पणियाँ
- २
प्रा० पा०—योगेशैश्च।