सुन्दरी! अवश्य ही विधाताने दया करके शरीरधारियोंकी सम्पूर्ण इन्द्रियों एवं मनको तृप्त करनेके लिये तुम्हें यहाँ भेजा है॥ ५॥✎ 716
नूनं त्वं विधिना सुभ्रूः प्रेषितासि शरीरिणाम्।
सर्वेन्द्रियमनःप्रीतिं विधातुं सघृणेन किम्॥ ५
सुन्दरी! अवश्य ही विधाताने दया करके शरीरधारियोंकी सम्पूर्ण इन्द्रियों एवं मनको तृप्त करनेके लिये तुम्हें यहाँ भेजा है॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 948) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/9/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)