श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.12.13

नवम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

बृहद्राजस्तु१ तस्यापि बर्हिस्तस्मात् कृतंजयः।

रणंजयस्तस्य सुतः संजयो भविता ततः॥ १३

bṛhadrājastu tasyāpi barhistasmāt kṛtaṃjayaḥ|

raṇaṃjayastasya sutaḥ saṃjayo bhavitā tataḥ|| 13

अर्थ

अमित्रजित्से बृहद्राज, बृहद्राजसे बर्हि, बर्हिसे कृतंजय, कृतंजयसे रणंजय और उससे संजय होगा॥ १३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    बृहद्भुजस्तु।

    (मुद्रित पृष्ठ 66)

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