॥ श्रीहरिः ॥
तस्माच्छाक्योऽथ२ शुद्धोदो लांगलस्तत्सुतः स्मृतः।
ततः प्रसेनजित् तस्मात् क्षुद्रको भविता ततः॥ १४
tasmācchākyo'tha śuddhodo lāṃgalastatsutaḥ smṛtaḥ|
tataḥ prasenajit tasmāt kṣudrako bhavitā tataḥ|| 14
अर्थ
संजयका शाक्य, उसका शुद्धोद और शुद्धोदका लांगल, लांगलका प्रसेनजित् और प्रसेनजित्का पुत्र क्षुद्रक होगा॥ १४॥
तस्माच्छाक्योऽथ शुद्धोदो लांगलस्तत्सुतः स्मृतः।
ततः प्रसेनजित् तस्मात् क्षुद्रको भविता ततः॥ १४
संजयका शाक्य, उसका शुद्धोद और शुद्धोदका लांगल, लांगलका प्रसेनजित् और प्रसेनजित्का पुत्र क्षुद्रक होगा॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.12.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 66) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/12/14/टिप्पणियाँ
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तस्मात्साध्योऽथ।
(मुद्रित पृष्ठ 66)