श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

शृणु भार्गव्यमूं गाथां मद्विधाचरितां भुवि।

धीरा यस्यानुशोचन्ति वने ग्रामनिवासिनः॥ २

śṛṇu bhārgavyamūṃ gāthāṃ madvidhācaritāṃ bhuvi|

dhīrā yasyānuśocanti vane grāmanivāsinaḥ|| 2

अर्थ

‘भृगुनन्दिनी! तुम यह गाथा सुनो। पृथ्वीमें मेरे ही समान विषयीका यह सत्य इतिहास है। ऐसे ही ग्रामवासी विषयी पुरुषोंके सम्बन्धमें वनवासी जितेन्द्रिय पुरुष दुःखके साथ विचार किया करते हैं कि इनका कल्याण कैसे होगा?॥ २॥✎ 1644

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1644 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ग्राम-वासी → ग्रामवासी

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें