श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

चक्रं दक्षिणहस्तेऽस्य पद्मकोशोऽस्य पादयोः।

ईजे महाभिषेकेण सोऽभिषिक्तोऽधिराड् विभुः॥ २४

cakraṃ dakṣiṇahaste'sya padmakośo'sya pādayoḥ|

īje mahābhiṣekeṇa so'bhiṣikto'dhirāḍ vibhuḥ|| 24

अर्थ

उसके दाहिने हाथमें चक्रका चिह्न था और पैरोंमें कमल-कोषका। महाभिषेककी विधिसे राजाधिराजके पदपर उसका अभिषेक हुआ। भरत बड़ा शक्तिशाली राजा था॥ २४॥✎ 1647

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1647 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पद-पर → पदपर

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