॥ श्रीहरिः ॥
मृगाञ्छुक्लदतः कृष्णान् हिरण्येन परीवृतान्।
अदात् कर्मणि मष्णारे नियुतानि चतुर्दश॥ २८
mṛgāñchukladataḥ kṛṣṇān hiraṇyena parīvṛtān|
adāt karmaṇi maṣṇāre niyutāni caturdaśa|| 28
अर्थ
यज्ञमें एक कर्म होता है ‘मष्णार’। उसमें भरतने सुवर्णसे विभूषित, श्वेत दाँतोंवाले तथा काले रंगके चौदह लाख हाथी दान किये॥ २८॥✎ 1647
मृगाञ्छुक्लदतः कृष्णान् हिरण्येन परीवृतान्।
अदात् कर्मणि मष्णारे नियुतानि चतुर्दश॥ २८
यज्ञमें एक कर्म होता है ‘मष्णार’। उसमें भरतने सुवर्णसे विभूषित, श्वेत दाँतोंवाले तथा काले रंगके चौदह लाख हाथी दान किये॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 98) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/20/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1647 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पद-पर → पदपर