श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

मृगाञ्छुक्लदतः कृष्णान् हिरण्येन परीवृतान्।

अदात् कर्मणि मष्णारे नियुतानि चतुर्दश॥ २८

mṛgāñchukladataḥ kṛṣṇān hiraṇyena parīvṛtān|

adāt karmaṇi maṣṇāre niyutāni caturdaśa|| 28

अर्थ

यज्ञमें एक कर्म होता है ‘मष्णार’। उसमें भरतने सुवर्णसे विभूषित, श्‍वेत दाँतोंवाले तथा काले रंगके चौदह लाख हाथी दान किये॥ २८॥✎ 1647

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1647 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पद-पर → पदपर

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