॥ श्रीहरिः ॥
ततो निराशो दुर्वासाः पदं भगवतो ययौ।
वैकुण्ठाख्यं यदध्यास्ते श्रीनिवासः श्रिया सह॥ ६०
tato nirāśo durvāsāḥ padaṃ bhagavato yayau|
vaikuṇṭhākhyaṃ yadadhyāste śrīnivāsaḥ śriyā saha|| 60
अर्थ
वहाँसे भी निराश होकर दुर्वासा भगवान्के परमधाम वैकुण्ठमें गये। लक्ष्मीपति भगवान् लक्ष्मीके साथ वहीं निवास करते हैं॥ ६०॥
ततो निराशो दुर्वासाः पदं भगवतो ययौ।
वैकुण्ठाख्यं यदध्यास्ते श्रीनिवासः श्रिया सह॥ ६०
वहाँसे भी निराश होकर दुर्वासा भगवान्के परमधाम वैकुण्ठमें गये। लक्ष्मीपति भगवान् लक्ष्मीके साथ वहीं निवास करते हैं॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 26) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/60/