श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.36

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अट्टशूला* जनपदाः शिवशूला द्विजातयः।

कामिन्यः केशशूलिन्यः सम्भवन्ति कलाविह॥ ३६

aṭṭaśūlā janapadāḥ śivaśūlā dvijātayaḥ|

kāminyaḥ keśaśūlinyaḥ sambhavanti kalāviha|| 36

अर्थ

इस कलियुगमें सभी देशवासी बाजारोंमें अन्‍न बेचने लगे हैं, ब्राह्मणलोग पैसा लेकर वेद पढ़ाते हैं और स्त्रियाँ वेश्या-वृत्तिसे निर्वाह करने लगी हैं॥ ३६॥✎ 1562

टिप्पणियाँ

  1. *

    अट्टमन्‍नं शिवो वेदः शूलो विक्रय उच्यते। केशो भगमिति प्रोक्तमृषिभिस्तत्त्वदर्शिभिः॥

    (मुद्रित पृष्ठ 36)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1562 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कलि-युगने → कलियुगने

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