श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.52

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

जरठत्वं समायातौ तेन दुःखेन दुःखिता।

साहं तु तरुणी कस्मात्सुतौ वृद्धाविमौ कुतः॥ ५२

jaraṭhatvaṃ samāyātau tena duḥkhena duḥkhitā|

sāhaṃ tu taruṇī kasmātsutau vṛddhāvimau kutaḥ|| 52

अर्थ

ये दोनों बूढ़े हो गये हैं—इसी दुःखसे मैं दुःखी हूँ। मैं तरुणी क्यों और ये दोनों मेरे पुत्र बूढ़े क्यों?॥ ५२॥

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