श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.53

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

त्रयाणां सहचारित्वाद्वैपरीत्यं कुतः स्थितम्।

घटते जरठा माता तरुणौ तनयाविति॥ ५३

trayāṇāṃ sahacāritvādvaiparītyaṃ kutaḥ sthitam|

ghaṭate jaraṭhā mātā taruṇau tanayāviti|| 53

अर्थ

हम तीनों साथ-साथ रहनेवाले हैं। फिर यह विपरीतता क्यों? होना तो यह चाहिये कि माता बूढ़ी हो और पुत्र तरुण॥ ५३॥

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