श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.6

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

इह घोरे कलौ प्रायो जीवश्चासुरतां गतः।

क्लेशाक्रान्तस्य तस्यैव शोधने किं परायणम्॥ ६

iha ghore kalau prāyo jīvaścāsuratāṃ gataḥ|

kleśākrāntasya tasyaiva śodhane kiṃ parāyaṇam|| 6

अर्थ

इस घोर कलिकालमें जीव प्रायः आसुरी स्वभावके हो गये हैं, विविध क्लेशोंसे आक्रान्त इन जीवोंको शुद्ध (दैवीशक्तिसम्पन्‍न) बनानेका सर्वश्रेष्ठ उपाय क्या है?॥ ६॥✎ 1560 1561

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1560 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कलि-कालमें → कलिकालमें
  • #1561 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: रसायन—अमृत-स्वरूप → रसायन—अमृतस्वरूप

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