पण्डितोंकी यह दशा है कि वे अपनी स्त्रियोंके साथ पशुकी तरह रमण करते हैं; उनमें संतान पैदा करनेकी ही कुशलता पायी जाती है, मुक्ति-साधनमें वे सर्वथा अकुशल हैं॥ ७५॥
पण्डितास्तु कलत्रेण रमन्ते महिषा इव।
पुत्रस्योत्पादने दक्षा अदक्षा मुक्तिसाधने॥ ७५
पण्डितोंकी यह दशा है कि वे अपनी स्त्रियोंके साथ पशुकी तरह रमण करते हैं; उनमें संतान पैदा करनेकी ही कुशलता पायी जाती है, मुक्ति-साधनमें वे सर्वथा अकुशल हैं॥ ७५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.75 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 39) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/75/