श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.75

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

पण्डितास्तु कलत्रेण रमन्ते महिषा इव।

पुत्रस्योत्पादने दक्षा अदक्षा मुक्तिसाधने॥ ७५

paṇḍitāstu kalatreṇa ramante mahiṣā iva|

putrasyotpādane dakṣā adakṣā muktisādhane|| 75

अर्थ

पण्डितोंकी यह दशा है कि वे अपनी स्त्रियोंके साथ पशुकी तरह रमण करते हैं; उनमें संतान पैदा करनेकी ही कुशलता पायी जाती है, मुक्ति-साधनमें वे सर्वथा अकुशल हैं॥ ७५॥

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