श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.76

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

न हि वैष्णवता कुत्र सम्प्रदायपुरःसरा।

एवं प्रलयतां प्राप्तो वस्तुसारः स्थले स्थले॥ ७६

na hi vaiṣṇavatā kutra sampradāyapuraḥsarā|

evaṃ pralayatāṃ prāpto vastusāraḥ sthale sthale|| 76

अर्थ

सम्प्रदायानुसार प्राप्त हुई वैष्णवता भी कहीं देखनेमें नहीं आती। इस प्रकार जगह-जगह सभी वस्तुओंका सार लुप्त हो गया है॥ ७६॥

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