श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.12

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

उपेक्षातः कलौ मन्दौ वृद्धौ जातौ सुतौ तव।

तथापि चिन्तां मुञ्च त्वमुपायं चिन्तयाम्यहम्॥ १२

upekṣātaḥ kalau mandau vṛddhau jātau sutau tava|

tathāpi cintāṃ muñca tvamupāyaṃ cintayāmyaham|| 12

अर्थ

फिर भी कलियुगमें इनकी उपेक्षा होनेके कारण तुम्हारे ये पुत्र उत्साहहीन और वृद्ध हो गये हैं; फिर भी तुम चिन्ता न करो, मैं इनके नवजीवनका उपाय सोचता हूँ॥ १२॥

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