श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.24

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

कृपालुना त्वया साधो मद‍्बाधा ध्वंसिता क्षणात्।

पुत्रयोश्चेतना नास्ति ततो बोधय बोधय॥ २४

kṛpālunā tvayā sādho madbādhā dhvaṃsitā kṣaṇāt|

putrayoścetanā nāsti tato bodhaya bodhaya|| 24

अर्थ

साधो! आप बड़े कृपालु हैं। आपने क्षणभरमें ही मेरा सारा दुःख दूर कर दिया। किन्तु अभी मेरे पुत्रोंमें चेतना नहीं आयी है; आप इन्हें शीघ्र ही सचेत कर दीजिये, जगा दीजिये॥ २४॥

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