श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सूत उवाच

तस्या वचः समाकर्ण्य कारुण्यं नारदो गतः।

तयोर्बोधनमारेभे कराग्रेण विमर्दयन्॥ २५

tasyā vacaḥ samākarṇya kāruṇyaṃ nārado gataḥ|

tayorbodhanamārebhe karāgreṇa vimardayan|| 25

अर्थ

सूतजी कहते हैं—भक्तिके ये वचन सुनकर नारदजीको बड़ी करुणा आयी और वे उन्हें हाथसे हिला-डुलाकर जगाने लगे॥ २५॥✎ 1966

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी

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