श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.27

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

वेदवेदान्तघोषैश्‍च गीतापाठैर्मुहुर्मुहुः।

बोध्यमानौ तदा तेन कथंचिच्चोत्थितौ बलात्॥ २७

vedavedāntaghoṣaiśca gītāpāṭhairmuhurmuhuḥ|

bodhyamānau tadā tena kathaṃciccotthitau balāt|| 27

अर्थ

फिर उन्होंने वेदध्वनि, वेदान्तघोष और बार-बार गीतापाठ करके उन्हें जगाया; इससे वे जैसे-तैसे बहुत जोर लगाकर उठे॥ २७॥✎ 1966

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी

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