श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.3

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

त्वं तु भक्तिः प्रिया तस्य सततं प्राणतोऽधिका।

त्वयाऽऽहूतस्तु भगवान् याति नीचगृहेष्वपि॥ ३

tvaṃ tu bhaktiḥ priyā tasya satataṃ prāṇato'dhikā|

tvayā''hūtastu bhagavān yāti nīcagṛheṣvapi|| 3

अर्थ

फिर तुम तो भक्ति हो और सदा उन्हें प्राणोंसे भी प्यारी हो; तुम्हारे बुलानेपर तो भगवान् नीचोंके घरोंमें भी चले जाते हैं॥ ३॥✎ 9 10

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #9 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #10 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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