सत्य, त्रेता और द्वापर—इन तीन युगोंमें ज्ञान और वैराग्य मुक्तिके साधन थे; किन्तु कलियुगमें तो केवल भक्ति ही ब्रह्मसायुज्य (मोक्ष)-की प्राप्ति करानेवाली है॥ ४॥✎ 910
सत्यादित्रियुगे बोधवैराग्यौ मुक्तिसाधकौ।
कलौ तु केवला भक्तिर्ब्रह्मसायुज्यकारिणी॥ ४
सत्य, त्रेता और द्वापर—इन तीन युगोंमें ज्ञान और वैराग्य मुक्तिके साधन थे; किन्तु कलियुगमें तो केवल भक्ति ही ब्रह्मसायुज्य (मोक्ष)-की प्राप्ति करानेवाली है॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 40) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)