श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.5

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

इति निश्चित्य चिद्रूपः सद्रूपां त्वां ससर्ज ह।

परमानन्दचिन्मूर्तिः सुन्दरीं कृष्णवल्लभाम्॥ ५

iti niścitya cidrūpaḥ sadrūpāṃ tvāṃ sasarja ha|

paramānandacinmūrtiḥ sundarīṃ kṛṣṇavallabhām|| 5

अर्थ

यह सोचकर ही परमानन्दचिन्मूर्ति ज्ञानस्वरूप श्रीहरिने अपने सत्स्वरूपसे तुम्हें रचा है; तुम साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्रकी प्रिया और परम सुन्दरी हो॥ ५॥✎ 9 10

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #9 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #10 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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