श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.54

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अहो नारद धन्योऽसि विरक्तानां शिरोमणिः।

सदा श्रीकृष्णदासानामग्रणीर्योगभास्करः॥ ५४

aho nārada dhanyo'si viraktānāṃ śiromaṇiḥ|

sadā śrīkṛṣṇadāsānāmagraṇīryogabhāskaraḥ|| 54

अर्थ

नारदजी! आप धन्य हैं। आप विरक्तोंके शिरोमणि हैं। श्रीकृष्ण-दासोंके शाश्‍वत पथ-प्रदर्शक एवं भक्तियोगके भास्कर हैं॥ ५४॥✎ 11

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #11 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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