नारदजी! आप धन्य हैं। आप विरक्तोंके शिरोमणि हैं। श्रीकृष्ण-दासोंके शाश्वत पथ-प्रदर्शक एवं भक्तियोगके भास्कर हैं॥ ५४॥✎ 11
अहो नारद धन्योऽसि विरक्तानां शिरोमणिः।
सदा श्रीकृष्णदासानामग्रणीर्योगभास्करः॥ ५४
नारदजी! आप धन्य हैं। आप विरक्तोंके शिरोमणि हैं। श्रीकृष्ण-दासोंके शाश्वत पथ-प्रदर्शक एवं भक्तियोगके भास्कर हैं॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 45) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/54/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)