श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.56

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ऋषिभिर्बहवो लोके पन्थानः प्रकटीकृताः।

श्रमसाध्याश्‍च ते सर्वे प्रायः स्वर्गफलप्रदाः॥ ५६

ṛṣibhirbahavo loke panthānaḥ prakaṭīkṛtāḥ|

śramasādhyāśca te sarve prāyaḥ svargaphalapradāḥ|| 56

अर्थ

ऋषियोंने संसारमें अनेकों मार्ग प्रकट किये हैं; किंतु वे सभी कष्टसाध्य हैं और परिणाममें प्रायः स्वर्गकी ही प्राप्ति करानेवाले हैं॥ ५६॥✎ 11

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #11 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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