śramasādhyāśca te sarve prāyaḥ svargaphalapradāḥ|| 56
अर्थ
ऋषियोंने संसारमें अनेकों मार्ग प्रकट किये हैं; किंतु वे सभी कष्टसाध्य हैं और परिणाममें प्रायः स्वर्गकी ही प्राप्ति करानेवाले हैं॥ ५६॥✎ 11
ऋषिभिर्बहवो लोके पन्थानः प्रकटीकृताः।
श्रमसाध्याश्च ते सर्वे प्रायः स्वर्गफलप्रदाः॥ ५६
ऋषियोंने संसारमें अनेकों मार्ग प्रकट किये हैं; किंतु वे सभी कष्टसाध्य हैं और परिणाममें प्रायः स्वर्गकी ही प्राप्ति करानेवाले हैं॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 45) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/56/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)