श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.28

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

किं श्रुतैर्बहुभिः शास्त्रैः पुराणैश्‍च भ्रमावहैः।

एकं भागवतं शास्त्रं मुक्तिदानेन गर्जति॥ २८

kiṃ śrutairbahubhiḥ śāstraiḥ purāṇaiśca bhramāvahaiḥ|

ekaṃ bhāgavataṃ śāstraṃ muktidānena garjati|| 28

अर्थ

बहुत-से शास्त्र और पुराण सुननेसे क्या लाभ है, इससे तो व्यर्थका भ्रम बढ़ता है। मुक्ति देनेके लिये तो एकमात्र भागवतशास्त्र ही गरज रहा है॥ २८॥✎ 1567

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1567 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शुकशास्त्र-की → शुकशास्त्रकी

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