तपोधनो! जबतक लोग अच्छी तरह श्रीमद्भागवतका श्रवण नहीं करते, तभीतक उनके शरीरमें पाप निवास करते हैं॥ ३१॥✎ 1567
तावत्पापानि देहेऽस्मिन्निवसन्ति तपोधनाः।
यावन्न श्रूयते सम्यक् श्रीमद्भागवतं नरैः॥ ३१
तपोधनो! जबतक लोग अच्छी तरह श्रीमद्भागवतका श्रवण नहीं करते, तभीतक उनके शरीरमें पाप निवास करते हैं॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 49) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)