श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.31

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तावत्पापानि देहेऽस्मिन्‍निवसन्ति तपोधनाः।

यावन्‍न श्रूयते सम्यक् श्रीमद्भागवतं नरैः॥ ३१

tāvatpāpāni dehe'sminnivasanti tapodhanāḥ|

yāvanna śrūyate samyak śrīmadbhāgavataṃ naraiḥ|| 31

अर्थ

तपोधनो! जबतक लोग अच्छी तरह श्रीमद्भागवतका श्रवण नहीं करते, तभीतक उनके शरीरमें पाप निवास करते हैं॥ ३१॥✎ 1567

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1567 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शुकशास्त्र-की → शुकशास्त्रकी

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