फलकी दृष्टिसे इस शुकशास्त्रकथाकी समता गंगा, गया, काशी, पुष्कर या प्रयाग—कोई तीर्थ भी नहीं कर सकता॥ ३२॥✎ 1567
न गङ्गा न गया काशी पुष्करं न प्रयागकम्।
शुकशास्त्रकथायाश्च फलेन समतां नयेत्॥ ३२
फलकी दृष्टिसे इस शुकशास्त्रकथाकी समता गंगा, गया, काशी, पुष्कर या प्रयाग—कोई तीर्थ भी नहीं कर सकता॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 49) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)