श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.51

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यज्ञाद्गर्जति सप्ताहः सप्ताहो गर्जति व्रतात्।

तपसो गर्जति प्रोच्चैस्तीर्थान्‍नित्यं हि गर्जति॥ ५१

yajñādgarjati saptāhaḥ saptāho garjati vratāt|

tapaso garjati proccaistīrthānnityaṃ hi garjati|| 51

अर्थ

सप्ताहश्रवण यज्ञसे बढ़कर है, व्रतसे बढ़कर है, तपसे कहीं बढ़कर है। तीर्थसेवनसे तो सदा ही बड़ा है, योगसे बढ़कर है—यहाँतक कि ध्यान और ज्ञानसे भी बढ़कर है, अजी! इसकी विशेषताका कहाँतक वर्णन करें, यह तो सभीसे बढ़-चढ़कर है॥ ५१-५२॥

यह अर्थ श्लोक 51–52 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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