॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.3.52
योगाद्गर्जति सप्ताहो ध्यानाज्ज्ञानाच्च गर्जति।
किं ब्रूमो गर्जनं तस्य रे रे गर्जति गर्जति॥ ५२
yogādgarjati saptāho dhyānājjñānācca garjati|
kiṃ brūmo garjanaṃ tasya re re garjati garjati|| 52
अर्थ
सप्ताहश्रवण यज्ञसे बढ़कर है, व्रतसे बढ़कर है, तपसे कहीं बढ़कर है। तीर्थसेवनसे तो सदा ही बड़ा है, योगसे बढ़कर है—यहाँतक कि ध्यान और ज्ञानसे भी बढ़कर है, अजी! इसकी विशेषताका कहाँतक वर्णन करें, यह तो सभीसे बढ़-चढ़कर है॥ ५१-५२॥