श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.53

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

शौनक उवाच

साश्‍चर्यमेतत्कथितं कथानकं ज्ञानादिधर्मान् विगणय्य साम्प्रतम्।

निःश्रेयसे भागवतं पुराणं जातं कुतो योगविदादिसूचकम्॥ ५३

sāścaryametatkathitaṃ kathānakaṃ jñānādidharmān vigaṇayya sāmpratam|

niḥśreyase bhāgavataṃ purāṇaṃ jātaṃ kuto yogavidādisūcakam|| 53

अर्थ

शौनकजीने पूछा—सूतजी! यह तो आपने बड़े आश्‍चर्यकी बात कही। अवश्य ही यह भागवतपुराण योगवेत्ता ब्रह्माजीके भी आदिकारण श्रीनारायणका निरूपण करता है; परन्तु यह मोक्षकी प्राप्तिमें ज्ञानादि सभी साधनोंका तिरस्कार करके इस युगमें उनसे भी कैसे बढ़ गया?॥ ५३॥

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