शौनकजीने पूछा—सूतजी! यह तो आपने बड़े आश्चर्यकी बात कही। अवश्य ही यह भागवतपुराण योगवेत्ता ब्रह्माजीके भी आदिकारण श्रीनारायणका निरूपण करता है; परन्तु यह मोक्षकी प्राप्तिमें ज्ञानादि सभी साधनोंका तिरस्कार करके इस युगमें उनसे भी कैसे बढ़ गया?॥ ५३॥
साश्चर्यमेतत्कथितं कथानकं ज्ञानादिधर्मान् विगणय्य साम्प्रतम्।
निःश्रेयसे भागवतं पुराणं जातं कुतो योगविदादिसूचकम्॥ ५३
शौनकजीने पूछा—सूतजी! यह तो आपने बड़े आश्चर्यकी बात कही। अवश्य ही यह भागवतपुराण योगवेत्ता ब्रह्माजीके भी आदिकारण श्रीनारायणका निरूपण करता है; परन्तु यह मोक्षकी प्राप्तिमें ज्ञानादि सभी साधनोंका तिरस्कार करके इस युगमें उनसे भी कैसे बढ़ गया?॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 51) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/53/