वहाँ आप बिना किसी विशेष प्रयत्नके ही ज्ञानयज्ञ आरम्भ कर दीजिये, उस स्थानपर कथामें अपूर्व रसका उदय होगा॥ ७॥
ज्ञानयज्ञस्त्वया तत्र कर्तव्यो ह्यप्रयत्नतः।
अपूर्वरसरूपा च कथा तत्र भविष्यति॥ ७
वहाँ आप बिना किसी विशेष प्रयत्नके ही ज्ञानयज्ञ आरम्भ कर दीजिये, उस स्थानपर कथामें अपूर्व रसका उदय होगा॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 48) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/7/