श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.8

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

पुरःस्थं निर्बलं चैव जराजीर्णकलेवरम्।

तद‍्द्वयं च पुरस्कृत्य भक्तिस्तत्रागमिष्यति॥ ८

puraḥsthaṃ nirbalaṃ caiva jarājīrṇakalevaram|

taddvayaṃ ca puraskṛtya bhaktistatrāgamiṣyati|| 8

अर्थ

भक्ति भी अपनी आँखोंके ही सामने निर्बल और जराजीर्ण अवस्थामें पड़े हुए ज्ञान और वैराग्यको साथ लेकर वहाँ आ जायगी॥ ८॥

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